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और ज़ाया ना होती

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गर यूँ ही बेवजह से मिल जाते तुम एक शाम और ना ज़ाया होती.. महफिलें तो हर रोज़ लग जाती हैं एक नज़्म और ना ज़ाया होती..
आ जाते बिन बुलाए दरवाज़े पर एक याद ना ज़ाया होती.. हम ढूँढ़ते ना तुम्हें दिल-ए-मुज़्तर हुए फिर ये मेरी बेख़ुदी ज़ाया ना होती..
बड़े शौक़ से रखे हैं कुछ जाम बचा के, गर यूँ ही बेवजह मिल जाते तुम, भर के जाम गैरों के  ये साक़ी ना ज़ाया होती..  ये साक़ी ना ज़ाया होती..

बियाह नही की हो अभी तक?

डिस्क्लेमर: इस कहानी के सभी पात्र भैंस की आँख सच्चे हैं.. और सत्य घटना से इसका लेना देना है! पात्रों का मेरी ज़िंदगी से क्या लेना देना है ये कोई घंटा नहीं जानता।तो बात कुछ ऐसे शुरू हुई की कल वर्क फ़्रम होम के नाम पर मार ली हमने छुट्टी।
सुबह उठने का मन नहीं क्यूँकि पिछली रात टिंडर पर बातें करते करते ३ बज गए. (जज मत कीजिए जवान हूँ सिंगल हूँ और आयुर्वेद, होमियोपैथी और घरेलू उपचार के गुणगान गाने की उम्र नहीं है)
हाँ जी, तो सुबह देर से उठी, दत्तो (हमारी कामवाली) को सख़्त हिदायत दी गयी थी झाड़ू पोछा लगाने के बाद पंखा न चला के जाए और काली (हमारी कुतिया) को हिदायत थी की मेरे कान पर न भौंके, बाल्कनी में भौंके!
ना काली मानी ना दत्तो! पतनहि ये औरतों में सुबह पंखा बंध करने की आदत कब जाएगी..
रियलिटी ये है साहब ये सब "ऑ सो स्वीट" वाले कुत्ते सिर्फ़ फ़ेस्बुक विडीओज़ पे वाइरल होते हैं सच्चाई में ये कान के आगे भौंकते हैं, दिन भर खुजाते हैं और वोही खाना खाते हैं जो आपकी प्लेट में है।
ख़ैर, हम उठे तो पता चला काली भौंक रही थी चुलबुली बुआ के आने पर।
वैसे चुलबुली बुआ का असली नाम शाकंभरी देवी था, …

Can’t love anymore..

झूठनहींबोलसकते! और relationship हलवाथोड़ीनाहैकीमिक्रोवेवमेंरी-हीटकरकेखालिया.. अंदरसेफ़ीलिंगनहींआएगीप्यारकैसेकरोगे?  औरपिछलेइक्स्पिरीयन्सनेप्यारकरनेकीहिम्मततोड़दीहैतोकिसीकोज़िंदगीमेंआनेकैसेदोगे? ऐसानहींहैआपकोशिशनहींकरते, करतेहो.. लेकिननहींहोताहै.. झूठनहींबोल

Why did she invite rape?

I have always thought the society I’m living which includes you and I would say if a “high class”, well articulate woman gets raped? We all are hypocrite of different levels.
What if a woman who wears short dresses, goes to parties with her friends, speaks Fluebt English, posts pictures of “#aboutlastnight” gets raped while coming back from office on an ordinary working day? 
or a woman who writes romance and gets raped by revengeful ex boyfriend? Or simply an articulate journalist who openly expresses her ideas about sex, relationships, female physical issues gets raped by unknown  bunch of people? Or a model who poses her beauty, maintains her physique, posts about health and fitness with gym selfies gets raped? Or a social media blogger who writes about periods issues, small breasts, bigger breasts, sex poses, relationship tips,and other ‘crispy topics’ we love to share and comment gets raped by someone who are not on social media? Or just another female photographer who has a Facebook pr…

Happiness is contagious - my new work environment

'Happiness is contagious' The extra added perk each morning, as you step in the company premises, hot-hotter-hottest hunks and young-tiny-tall bombshells surround you..
..greet you with smile and are happy to see you, eager to rush into the lecture hall because they know, they are going to laugh and giggle, their motivation level is going to get pumped up and they are going to have a charged up day.
The magic of smile is known, when Cute suited booted HR managers are always around you, if you need something..
And above all when all the hotness, cuteness, sexiness, mannerisms, hospitality, etiquette and elitism are bound to respect and listen to you..
Happiness is contagious, basic rule of hospitality/entertainment/service industry - I like the most about my company, it makes my day happy!!

फैसला..

ये फैसला तेरा है अब,
खुद को पूरा का या मुझे अधूरा कर जा,
मुझे काफ़िर बना दे या मेरा खुदा बन जा
तू जब भी मिलेगा सजदा तेरे लबों का करेंगे
या थाम मुझे और सुकून देदे, या जीने की ही वजह बन जा,
यूँ न खफा हो, है फासले तेरे मेरे दरम्यान,
मुझसे वफ़ा नहीं तो मुझे बेवफ़ा कर जा..
खुद को पूरा कर या मुझे अधूरा कर जा.. अब न ज़िद होगी, न इंतज़ार तेरे आने का,
ना होगा मकसद किसी बहाने का,
तू किसी और को चाह कर भी ना पा सका
तू मेरा ना बन, मुझे मेरा कर जा..
खुद को पूरा कर या मुझे अधूरा कर जा.. बस चंद लम्हों में हट गए तेरे कदम
हाथ थाम कर बैठा था बेवजह शायद
अब थाम ही ले हाथों को,
या मुझे बेवज़ह कर जा,
खुदा बन मेरा या मुझे काफ़िर कर जा..
है फैसला तेरा, मुझे अधूरा या पूरा कर जा.. तेरी मुहोब्बत, तेरी बगावत, तेरी रंजिश, तेरी मंज़िल ही सही
मुझे हमसफ़र ना सही, मेरा सफ़र बन जा,
वापस आ और समेट बाहों में बिखरने से पहले
या सैलाब आने दे और मुझे पत्थर कर जा..
अधूरा, या पूरा, पर फैसला कर जा..

To giveaway whatever you have..

After long.. very long.. maybe because I have accepted.. Believe in Karma, Have faith in God, accept the pain you're going through.  be thankful that he chose you for the sufferings because he wants to see you somewhere.. you just keep making efforts, and don't quit fighting. it's okay not to be strong enough to face the situation when each moment and everything pushes you to the edge to quit and accept your defeat, find the ray of hope..  GIVEAWAY the kind of LOVE you want to others   becausee you understand the worth and need of love, support and the warmth of hug somebody needs when in pain since you have been there and gone through it. The sufferings either make you a monster or make you human but the choice is yours because somewhere down the line you're the reason of your own miserable situations..
..and you will suffer till you seek dependence, somebody to come and lift you in arms, be your crutches.. 
meanwhile you're crippled and regretting for the loss…