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ख़ाक!

 लोग यूँ ही नहीं कहते थे तुझे काफिर उन्होंने देखा था तुझे ज़रूरत बदलते ही ख़ुदा बदलते हुए  मुझे मान लेना चाहिए था सब की हिदायतों को  बदनाम ऐसे ही नहीं होते, बदनीयत, रास्तों में चलते हुए लो अब खो बैठे यक़ीं, इश्क़ कुछ इबादत सा मालूम था हमें..  जो वुज़ू करते थे कभी हमसे रूबरू होने से पहले मिलते अब भी हैं किसी से, पर मेरी ख़ल्वत पर ख़ाक मलते हुए!!  लोग यूँ ही नहीं कहते थे तुझे काफिर  उन्होंने देखा था तुझे ज़रूरत बदलते ही ख़ुदा बदलते हुए  ख़ल्वत = emptiness  #Himmilicious  4/6/24
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People tell me, You’re dating someone!

  A million pieces scattered on the floor, Each one a glimpse of what we had before.  They whisper rumors,  a happiness you've found, While my heart breaks in a silent, echoing sound. How can I tell them I've seen it with my own eyes?  The way you held her, a love that used to be mine. The ache is a secret, a burden I hold, Pretending I don't know, a story left untold. A stranger in my own skin, I play the part,  Smiling through the hollowness that tears me apart. Wishing the truth could escape in a scream, But silence holds me captive, a shattered, silent dream. Maybe someday, the pieces will find their way back, Mended by time on a healing track. But for now, I wear this mask, a shield from the pain, Hoping one day, love will find me again

थोड़ी बेवफ़ाई कर!

तू सबका यार कैसे हो सकता है  किसी से तो बेवफ़ाई कर  हम ही हो रहे हैं बेवफ़ा से सोहबत में तेरी तू हमसे कभी शनासाई कर  बड़े मकम्मल से थे ये वादे तेरे वस्ल के अब पेशानी पे शिकन से आने लगी है  होना है तो हो जा सबका  आ फिर मुझ ही से बेवफ़ाई कर 

तेरा ज़िक्र मार रहा है

मैं दूसरों की बातों में तुझे ढूँढ रही हूँ   पर हर उस शख़्स को छोड़ रही हूँ   जो तेरे जाने के बाद मुझे तेरे ज़िक्र से मार रहा है   मैं मर रही हूँ की तुझे खबर तो पहुँचेगी  ये मेरा सब्र ही था जो अब हार रहा है  मैं बहाने बना कर खिड़की में कई बार  सँवार लेती हूँ बालों को अपने  तेरे ग़लीचे में खिल गये हैं नए फूल कोई तो है जो दरख़्त में पानी डाल रहा है  क्या ही बद्दुआ दूँ, जा हो जाए तुझे भी वो इश्क़  जो मुझे तुझसे हुआ!  ज़रा नफ़रत भी तो देख उसकी जो तेरा यार रहा है  मैं हर शख़्स को छोड़ रही हूँ !  जो मुझे तेरे ज़िक्र से मार रहा है 

तू तो अपना था!

ज़रा नज़ाकत से तो छोड़ के जाते  हम कभी ना कभी तो तुम्हारे थे बड़ी आसानी से मुड़े और चले गये उठ कर  मुझे मुग़ालतें बड़े सारे थे  ये ख़त, ये कंगन, ये किताबें, ये बालियाँ सब यूँ ही पड़े हैं दराज में बिखरे तेरे क़िस्से, कहानी, बातें और यादें सब यूँही खड़े हैं रातों में सिमटे  मैं अब भी तेरी तस्वीर देख कर मुस्कुरा देती हूँ  मैं अब भी टूट जाती हूँ की कभी तो कहीं से तू आ जाये  यार तू ही तो था मेरा अपना, यार तू तो ना बदलता, मुझे तुझसे ही गिले सारे थे  ज़रा नज़ाकत से तो छोड़ के जाते  हम कभी ना कभी तो तुम्हारे थे  HB 23/03/2024 @himmilicious

बुकमार्क

मैं, किताबें, तुम और तुम्हारे साथ बिताया हुआ वक़्त.. जहाँ न तुम कुछ बोलते थे न मैं कुछ बोलती थी, तुम चुपचाप एक कमरे में बैठे हुए अपना काम करते रहते थे और मैं आते जाते अपनी आधी कॉफी तुम्हारी टेबल पर रख जाती थी! मेरे लिए वही सबसे खूबसूरत पल हुआ करते थे जहाँ हम कुछ नहीं बोलते थे लेकिन दिल इस बात से शांत था कि तुम पास हो. कभी शरारत करने का मन करता तो पीछे से आकर तुम्हारे सिर पर टप से मार जाती या तुम मेरा मुंह भींच कर मेरी नाक चूम लेते! और सारा दिन खत्म होने के बाद जब बाहर जाने का मन करे तो तुम्हारा ही पजामा, तुम्हारी ही टी-शर्ट्स या तुम्हारी ही जैकेट पहन के बस ऐसे ही बिखरे बालों में चप्पल पहन कर तुम्हारे साथ निकल पड़ती थी.. मुझे तुम्हारी छोटी उंगली पकड़कर चलना बहुत पसंद था और मैं बस तुम्हें खींच कर किसी भी किताबों की दुकान में ले जाती थी.. ..तुम्हें भी पता था कि मुझे कुछ नहीं चाहिए, मेरे पास जो किताबों का ढेर पड़ा है, वो किताबें जो मैंने कभी नहीं पढ़ीं क्योंकि शायद मैं यह चाहती थी कि कभी तुम कोई भी एक किताब उठाओ और मुझे कुछ सुनाओ, सुनते सुनते मैं सो जाऊँ और तुम मुझे देर तक अपने सीन

रास्ते आसान कर दिये

   रास्ते आसान कर दिये  रास्ते आसान कर दिये  कभी आना,कभी जाना होता रहा  मैंने उसके रास्ते आसान कर दिये  ज़ख़्म कुछ ऐसे बना लिये ख़ुद पर  उसके भी इल्ज़ाम अपने नाम कर लिये  उसने ख़ैर तक ना पूछी जो मैंने कहा  थोड़ा वक़्त दो मैं ख़ुद को जोड़ लूँ  उसके तोड़े हुए दिल के कई इलाज कर लिये मैं थी ही नहीं उसकी रंगीन बारिश में कहीं  मैंने यूँ ही अपने ज़ख़्म लाल कर लिये  इस एक तरफ़ा इश्क़ का कोई मक़ाम नहीं होता ऊँस, अक़ीदत, ज़ुनून, सब ख़ाक कर लिये  मेरा इश्क़ मौत की और चलता जा रहा था  मैंने मौत के रास्ते आसान कर दिये कर दिया रुख़्सत महबूब को उसी की मयखाने में  हथेलीं में रखा ज़हर और ज़हर से लिखा उसका नाम  सुना है उसके नए आशिक़ ने उसके कई नाम रख दिये  ख़ैर.. मैंने उसे छोड़ दिया, ख़ुद पे इल्ज़ाम ले लिया बस उसके जाते वक़्त उसकी यादों के क़लाम पढ़ दिए फिर जो भी मिला उसके नाम का,  हम मुस्कुराए और उसको भी वही सलाम कर दिए.. Himadri 10/03/24 @himmilicious

बसंत और तुम

बसंत का जो रिश्ता फूलों से होता है  बस वही रिश्ता मुझसे तुमसे चाहिए था,  घंटों चुप बैठे रहते, तुम अपने काँधे को मेरे घुटनों से टिका कर, ना बात करते,  ना मैं कुछ तुमसे माँगती ना तुम्हारी कोई चाहत होती की मैं तुम्हें कुछ दूँ  तुम्हारी उँगलियों में अपनी उँगलियाँ फ़सा कर बैठी रहती, या तुम्हारे चेहरे पर कहीं उँगलियाँ फेरतीं रहती..  और जैसे ही हल्की सी सिहरन भरी हवा चलती  बस आँखें बंध करके तुम्हारे सीने में छुप जाती और सब कुछ ठीक हो जाता  इस बसंत, बस ऐसा ही मुझे तुमसे रिश्ता चाहिए था जो बसंत का होता है उसके फूलों से.. Himadri 6/3/24 @himmilicious

Sand Dune Eyes

  A wink ignites, laughter takes flight, Laphroaig's smoke, emerald light. Flawed moon, your reflection near, Imperfect, perfect, we hold dear. Whispered secrets, burning bright, Love's sweet symphony takes flight. Seasons turn, stained-glass gleam, Love's kaleidoscope, a shared dream. Branches sway, roots twist below, Letting go, with gentle flow. Memories whisper, bittersweet, Love's echo, forever complete. Himadri 04/03/2024 @himmicious

कितने लम्हें बीत गए हिचकी नही आई, तू बेवफ़ा है या तेरी यादें झूठी

  कितने लम्हें बीत गए हिचकी नही आई, तू बेवफ़ा है या तेरी यादें झूठी Himadri 05/01/2019 @himmicious