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Showing posts with the label Hindi Poetry

थोड़ी बेवफ़ाई कर!

तू सबका यार कैसे हो सकता है  किसी से तो बेवफ़ाई कर  हम ही हो रहे हैं बेवफ़ा से सोहबत में तेरी तू हमसे कभी शनासाई कर  बड़े मकम्मल से थे ये वादे तेरे वस्ल के अब पेशानी पे शिकन से आने लगी है  होना है तो हो जा सबका  आ फिर मुझ ही से बेवफ़ाई कर 

तेरा ज़िक्र मार रहा है

मैं दूसरों की बातों में तुझे ढूँढ रही हूँ   पर हर उस शख़्स को छोड़ रही हूँ   जो तेरे जाने के बाद मुझे तेरे ज़िक्र से मार रहा है   मैं मर रही हूँ की तुझे खबर तो पहुँचेगी  ये मेरा सब्र ही था जो अब हार रहा है  मैं बहाने बना कर खिड़की में कई बार  सँवार लेती हूँ बालों को अपने  तेरे ग़लीचे में खिल गये हैं नए फूल कोई तो है जो दरख़्त में पानी डाल रहा है  क्या ही बद्दुआ दूँ, जा हो जाए तुझे भी वो इश्क़  जो मुझे तुझसे हुआ!  ज़रा नफ़रत भी तो देख उसकी जो तेरा यार रहा है  मैं हर शख़्स को छोड़ रही हूँ !  जो मुझे तेरे ज़िक्र से मार रहा है 

तू तो अपना था!

ज़रा नज़ाकत से तो छोड़ के जाते  हम कभी ना कभी तो तुम्हारे थे बड़ी आसानी से मुड़े और चले गये उठ कर  मुझे मुग़ालतें बड़े सारे थे  ये ख़त, ये कंगन, ये किताबें, ये बालियाँ सब यूँ ही पड़े हैं दराज में बिखरे तेरे क़िस्से, कहानी, बातें और यादें सब यूँही खड़े हैं रातों में सिमटे  मैं अब भी तेरी तस्वीर देख कर मुस्कुरा देती हूँ  मैं अब भी टूट जाती हूँ की कभी तो कहीं से तू आ जाये  यार तू ही तो था मेरा अपना, यार तू तो ना बदलता, मुझे तुझसे ही गिले सारे थे  ज़रा नज़ाकत से तो छोड़ के जाते  हम कभी ना कभी तो तुम्हारे थे  HB 23/03/2024 @himmilicious

रास्ते आसान कर दिये

   रास्ते आसान कर दिये  रास्ते आसान कर दिये  कभी आना,कभी जाना होता रहा  मैंने उसके रास्ते आसान कर दिये  ज़ख़्म कुछ ऐसे बना लिये ख़ुद पर  उसके भी इल्ज़ाम अपने नाम कर लिये  उसने ख़ैर तक ना पूछी जो मैंने कहा  थोड़ा वक़्त दो मैं ख़ुद को जोड़ लूँ  उसके तोड़े हुए दिल के कई इलाज कर लिये मैं थी ही नहीं उसकी रंगीन बारिश में कहीं  मैंने यूँ ही अपने ज़ख़्म लाल कर लिये  इस एक तरफ़ा इश्क़ का कोई मक़ाम नहीं होता ऊँस, अक़ीदत, ज़ुनून, सब ख़ाक कर लिये  मेरा इश्क़ मौत की और चलता जा रहा था  मैंने मौत के रास्ते आसान कर दिये कर दिया रुख़्सत महबूब को उसी की मयखाने में  हथेलीं में रखा ज़हर और ज़हर से लिखा उसका नाम  सुना है उसके नए आशिक़ ने उसके कई नाम रख दिये  ख़ैर.. मैंने उसे छोड़ दिया, ख़ुद पे इल्ज़ाम ले लिया बस उसके जाते वक़्त उसकी यादों के क़लाम पढ़ दिए फिर जो भी मिला उसके नाम का,  हम मुस्कुराए और उसको भी वही सलाम कर दिए.. Himadri 10/03/24 @himmilicious

वहीं चले आए..

वहीं से उठे और वहीं चले आए बड़े ग़ुरूर से हम वो बात कह आए ढूंढ लो कहीं , है जमीं, है आसमाँ यहीं तुमसे तो ज़्यादा करीब हैं तुम्हारे साए वहीं से उठे और वहीं चले आए..  वो टूटे से थे कुछ, कुछ ज़्यादा ही, सहमा सा इश्क कर बैठे, आधा, कुछ आधा ही, हम थाम लें भर कर चहरे को इन हाथो में उलझा कर इस सहमे हुए दिल को बातों में  की फिर से पहली सी मुहोब्बत एक बार हो जाए वहीं से उठे और वहीं चले आए.. बड़ा मुश्किल हो चला , है यह एक तरफ़ा इश्क़ सा ज़ाया हम ही आएंगे लौट कर, ख़ुद ही को समझाया वो मेरा क्या होगा, जो खुद का न हो सका हम तो समझ गए पर इस दिल को कौन समझाए रूठ कर उनसे, बड़े ग़ुरूर में कह आए तुमसे करीब हैं सिर्फ, तुम्हारे साए और खुद ही हार गए अपनी जिद से फिर वहीं से उठे और वहीं चले आए...  HIMADRI 16/02/2021 @himmilicious

टपरी पर उनकी सिगरेट..

बड़े अरसे बाद वो मिल गए उसी चौराहे पर टपरी के कोने में सिगरेट जलाए होते थे निकलेंगे अभी हम बस इसी रास्ते से उन चाय के न जाने कितने बकाए होते थे हर रोज़ फेंक देते थे वो अध बुझी सी बातें कोई देख लेगा तो क्या हो और हर रोज़ फिर जला लेते थे ख़ुद-बुनी यादें के एक रोज़ कह ही दे तो क्या हो बड़े अरसे बाद वह मिल गए उसी कुर्ते में होली के दाग छुड़ाए होते थे लटकती थी एक जेब उनकी माचिस से ना जाने कैसे ऐब लगाए होते थे बड़े अरसे बाद वो मिल गए उसी चौराहे पर टपरी के कोने में, सिगरेट जलाए होते थे.. Himadri 14/01/2021 @himmicious

क्यों आए थे?

ये वक़्त-बेवक़्त की बचकानी बातें हैं, इन्हें जाने दो.. तुम समझ नही पाओगी,तुम्हे समझाने दो..  ऐसी तरक़ीब से उन्होंने उलझा के रख दी बड़ी मुश्किल से जो मसले सुझाए थे रहना - ना रहना बाद कि बाते हैं गर नामालूम था पता, तो क्यों आये थे?  हाँ ठीक! तुम सही, हम गलत,  सब गलत, ये इश्क गलत.. हमने तो न दी थी वजह, ना रास्ते बताए थे, गर ना मालूम था पता, तो क्यों आए थे?   मान लेते हैं तुम यूँ ही निकल आये, चलो जाने दो..  हम फिर संभाल जाएंगे, थोड़ा टूट जाने दो..  ये इश्क के फ़लसफ़े हैं, यूँ ही नही बन जाते..  कभी तो आओगे पलट के, तो पूछ लेंगे..  क्यों आए थे?  Himadri 08/01/2021 @himmicious

जाड़ों जैसी, तेरी याद..

सर्दियों कि धुंधली सुबह सी तेरी याद  नम करती आँखें कुछ वैसे ही  कंपकंपाते होंठ और थरथराता जिस्म  वैसे ही जैसे, जाड़े कि सुबहों में  तुम भीगे हाथ लगते थे  और हँसते थे मेरे रूस जाने पर  और सर्द रातों सी ये तेरी याद  सुनसान रातों में किटकिटाते दांतों सी, खुद ही को देती सुनाई  गर्म साँसों को फूँकती और हथेली को करती गर्म  घिसती और टांगों के बीच छुपाती  ठंडी सी नाक और  खुश्क लब  और उनमे बसी, जाड़ों जैसी, तेरी  याद.. Himadri 9 Nov 2020 @himmicious

अधूरा सा

शाख से टूटे पत्ते आ कर मेरी गोद में गिरे थे, पीले, चुरमुरे, रंगमिटे से  आज उनमे से एक पत्ता किताब के पन्नो के बीच मिल गया, भूरा, चुरमुरा, अधूरा सा, ठीक वैसा ही ठहरा जैसे वो पल ठहरा है जब बारिष से पहले  ज़ोरों कि हवा में उलझ गयी थी मेरी लटें, और सुलझाने के बहाने तुमने गालों को छुआ था मेरे, हाँ, वो पल, वैसा ही है , मटमैला, चुरमुरा और अधूरा.. Himadri 9 Nov 2020 @himmicious

और ज़ाया ना होती

गर यूँ ही बेवजह से मिल जाते तुम एक शाम और ना ज़ाया होती.. महफिलें तो हर रोज़ लग जाती हैं एक नज़्म और ना ज़ाया होती.. आ जाते बिन बुलाए दरवाज़े पर एक याद ना ज़ाया होती.. हम ढूँढ़ते ना तुम्हें दिल-ए-मुज़्तर हुए फिर ये मेरी बेख़ुदी ज़ाया ना होती.. बड़े शौक़ से रखे हैं कुछ जाम बचा के, गर यूँ ही बेवजह मिल जाते तुम, भर के जाम गैरों के  ये साक़ी ना ज़ाया होती..  ये साक़ी ना ज़ाया होती.. Himadri 23 Nov 2019 @himmicious

ए वक्त ,तू गवाह है

ऐ वक्त, तू गवाह है.. कभी वो सजी हुई वैश्या सा बिछा है मेरे आगे.. और ये भी तूने देखा है, कैसै सुबह के सूरज सा जला है वो देखा है यह भी  बनारस के पाखंडी सा घूनी रमा और जो फिर हर रात वो गले में इतर, होंठ लाल कर एक नई कली मसलने चला.. देखा है तूने मुझे भी उसके सिर को रखा है गोद में एक माँ की तरह और परोसा है खुद को मैने भरे वॅक्षो से मेघ की तरह ए वक्त ,तू गवाह है वो बिछा है मेरे आगे, वेश्या की तरह.. मुड़ा ना वो, गुजरा जब मेरे  शामियाने से आगे, नज़रें बचा फिर भी गिरी उसकी निगाहें कनखियों से हमपर  के देख ना लूँ मैं कहीं उसके कुर्ते पर पड़े नयी कली के निशान.. मेरे खरीदार ने निभाये हैं किरदार कई, कभी मेरी तरह, कभी अपनी तरह... Himadri 05/01/2014 @himmicious